Wednesday, 6 July 2016

सियासत,केजरीवाल और मीडिया....



इस देश में एक ही राजनीतिक दल ऐसा है जिसका गठन,प्रचार और लोकप्रियता शुरू से ही मीडिया पर निर्भर रही है। यह दल है आम आदमी पार्टी। अरविंद केजरीवाल यूपीए सरकार के भ्रष्टाचार के खिलाफ शुरू हुए आन्दोलन मे शमिल थे। अन्ना हजारे की भ्रष्टाचार के खिलाफ पहल को लोगों और मीडिया ने हाथांे-हाथ लिया था। टीवी और सोशल मीडिया पर लगातार प्रचार के कारण ही देश के आम लोग अन्ना हजारे के गुण गाने लगे थे। उन दिनो अन्ना के साथी रहे केजरीवाल ने यह समझ लिया की सोशल मीडिया के आधुनिक औजारों का इस्तेमाल करके लोगों पर कैसे प्रभाव डाला जा सकता हैं। इसके बाद उन्होने आम आदमी पार्टी का गठन किया और दिल्ली के मुख्यमंत्री बनेे। केजरीवाल ने अपने 49 दिन के शासनकाल मे चर्चा में बने रहने के लिए तमाम हथकण्डे अपनाये कुछ मुद्दों को लेकर केजरीवाल ने दिल्ली की गद्दी छोड़ दी,उन्हे भगोड़ा भी कहा गया। दिल्ली का दुबारा सीएम बनने के बाद केजरीवाल फिर मीडिया में नायक बन गये। दुसरी बार भी केजरीवाल सरकार का केन्द्र सरकार से हमेशा टकराव की स्थिति ही रही। पिछले ही साल दिल्ली मे उन्होने आॅड-ईवन की शुरूआत की तो अनेक लोगों ने उनकी इस उटपटांग चाल का स्वागत किया,बावजूद इसके कि कुछ ही दिनों में यह साबित हो गया कि यातायात पर प्रतिबन्ध लगाने से दिल्ली के प्रदुषण पर कोई प्रभाव नही पड़ा। आज दिल्ली के मुख्यमंत्री येनकेन प्रकरेण सुर्खियों में बने रहने के मामले में नायक बने हुए हैं वावजूद इसके कि उनके आने से दिल्ली वालों के जीवन में कोई खास फर्क नहीं पड़ा है। केजरीवाल राजनीति मे आए तो थे भ्रष्टाचार मिटाने, नई राजनीति की शुरूआत करने लेकिन अब उन बातों को भुला दिया गया है। उन्होने नई तरह की राजनीति की नीव भले ही न रखी पर यह जरूर बता दिया कि आधुनिक सियासत में मीडिया की भूमिका कितनी महत्वपूर्ण है।