खुला खत...
सेवा में
अखिलेश यादव मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश सरकार और डीजीपी जावेद अहमद यूपी पुलिस,
महोदय,
मैंने अंग्रेजों की गुलामी और अत्याचारों को तो नहीं देखा लेकिन जैसा मैंने किताबों में पढ़ा और लोगों से सुना उस दौर की पीड़ा और अत्याचार की झलक यूपी पुलिस के व्यवहार में साफ दिखाई देती है। जिससे लोगों को हमेशा दो चार होना पड़ता है। श्रीमान जी यूपी पुलिस को नैतिकता और लोगों की गरिमा का सम्मान करना सीखाना होगा। आप लोगों के तमाम दावों और वादों पर यूपी पुलिस पानी फेर देती है। ये लोग जब भी बोलेंगे उसमे अगर गाली और गुस्सा न हो यह दुनिया का बड़ा आश्चर्य होगा। भ्रष्टाचार और अत्याचार तो इनकी रगों में भरा पड़ा है। दो-चार अच्छे कामों पर इनके कारनामे पानी फेर देते है गांव और समाज में अभी भी पुलिस का खौफ अंग्रेजों के ज़माने वाला ही है। लोगों के जेहन में पुलिस का नाम आते ही सिहरन सी हो जाती है। पुलिस को पब्लिक से जोड़ने के दावों की हवा निकल चुकी है। समझ में नहीं आता की कानून की रखवाली के नाम पर पुलिस को गैर कानूनी काम करने का अधिकार किसने दे दिया। मानवाधिकारों,कोर्ट के आदेशों तथा तमाम रूल और रेगुलेशन की धज्जियां उड़ाकर पुलिस अपनी तानाशाही दिखाती है जिससे कई बार हम भी दो चार हो चुके हैं। भारत जैसे बड़े लोकतान्त्रिक देश में पुलिस के अमानवीय कारनामे बेहद शर्म की बात है। मुझे समझ में नहीं आता कि उपर के बड़े पुलिस अफसरों और सत्ता में बैठे जिम्मेदारों को यह सब पता नहीं है या उन्हें सब कुछ पता है और वे बेबस है कुछ कर नहीं पाते। कारण चाहे जो कुछ भी हो लेकिन इसका खामियाजा आम लोगों को अपना गौरव और सम्मान देकर चुकाना पड़ता है। जो सही मायने में अपराधी और माफिया है उनके आगे पुलिस बेबस है। पुलिस अपनी मर्दानगी गरीबो,मजदूरों या आम बेसहायों पर दिखाती है। लोगों के गरिमापूर्ण जिंदगी जीने और स्वतंत्रता के अधिकारों को पुलिस ने बेमानी साबित कर दिया है। एक कहावत है समरथ को नहीं नाथ गोसाई। यानि अगर आपके पास पैसा है पावर है आप समर्थ हैं तो आपके लिए सबकुछ जायज है पुलिस भी इनके साथ अतिथियों जैसे पेश आती है। वही गरीब ,मजदुर और असहायों के साथ पुलिस अपनी मर्दानगी दिखाती है कभी कभी तो क्रूरता की हदों को भी पार कर देती है कानूनी धाराएं लादने में इनका कोई शान ही नहीं है। पुलिस के रवैये से आम आदमी काफी भयभीत रहता है और वह कभी पुलिस के पचड़े में नहीं पड़ना चाहता,कई बार तो लोग पुलिस के डर से ही घायलो को अस्पताल पहुचाने का भी साहस नहीं जुटा पाते। पुलिस की जो छवि है वह किसी से छुपी नहीं है हकीकत सबको मालूम है लेकिन समाधान कब और कैसे होगा किसी को नहीं पता। सरकारें बदलती रहीं अगर कोई चीज नहीं बदली तो वह है पुलिस की छवि और कार्यप्रणाली। पुलिस विभाग में अच्छे लोग नहीं है ऐसी बात नहीं है लेकिन अच्छे लोगों की छवि और मेहनत पर पानी फेरने के लिए उससे कई गुना ज्यादा लोग हैं। मैं चाहता हूँ कि लोगों के मानवाधिकार और गरिमा की रक्षा हर हाल में सुनिश्चित की जाये और इसके लिये सभी जरुरी कदम उठाये जायें।
धन्यवाद
आपका- धर्मपाल यादव