Saturday, 19 November 2016

रिजर्व बैंक की गाईडलाइन: अगर आप नये नोट पर कुछ भी लिखते हैं तो उसे बैंक नही लेगें।

अगर आप नए नोट पर कुछ भी लिखते हैं तो उस नोट की कोई वैल्यू नहीं होगी। अर्थात नए लिखे हुए नोट बैंक नहीं लेगा। भारतीय रिवर्ज बैंक ने सभी बैंकों को सर्कुलर जारी किया है। इसमें लिखे हुए नए नोटों को न लेने के सख्त निर्देश दिए गए हैं। उल्लेखनीय है कि अब बैंकों में नोट गिनने की नई मशीनें आ रही हैं।
ये मशीनें उन नोटों को स्वीकार ही नहीं करेगी, जिन नोटों के ऊपर कुछ लिखा होगा। हालांकि, सूबे में अभी तक 2000 रुपये का नोट बाजार में आया है, लेकिन निर्देशों में 500 और 2000 रुपये के नए नोटों का जिक्र किया गया है। इसमें न लिखने की सख्त लोगों को भी हिदायत दी गई है।
गिनने वाली मशीनें भी नहीं करेंगी स्वीकार
लगभग सभी बैंकों के कर्मचारी लोगों को नए नोट देने से पहले जागरूक कर रहे हैं कि नए नोट पर कुछ भी न लिखें। लिखने से नोट बर्बाद भी हो सकता है, क्योंकि नए नोटों को गिनने वाली मशीनें इस स्वीकार नहीं करेंगी। एसबीआई मंडी के मुख्य प्रबंधक प्यार सिंह
ने कहा कि नए नोटों पर कुछ लिखा होगा तो उस नोट को नहीं लिया जाएगा। इस बारे में आरबीआई की ओर से सर्कुलर आया है। इसमें लिखे हुए नए नोटों को न लेने की हिदायत दी गई है। सभी एसबीआई और अन्य बैंकों के प्रबंधकों को इस बारे अवगत करवा दिया है।
साभार-अमरउजाला

Wednesday, 9 November 2016

मोदी की एक और सर्जिकल स्ट्राइक...

राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बड़ा ऐलान किया है। उन्होंने कहा है कि 8 नवंबर-9 नवंबर की मध्यरात्रि से 500 और 1000 के नोट बंद हो जाएंगे। पीएम ने कहा, '500 और 1000 रुपये के पुराने नोट 10 नवंबर से 30 दिसंबर 2016 तक आप अपने बैंक या डाकघर के खाते में जमा करवा सकते हैं।' 
जनता को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि आपकी धनराशि आपकी ही रहेगी, आपको कोई चिंता करने की जरूरत नहीं है। किसी कारणवश अगर आप 30 दिसंबर तक ये नोट जमा नहीं कर पाए, तो आपको एक आखिरी अवसर भी दिया जाएगा। आपके पास 50 दिनों का समय है।
500 और 1000 के नोटों के अलावा बाकी सभी नोट और सिक्के नियमित हैं और उनसे लेन-देन हो सकता है।
मुख्य बातें:
-देश में किसी को भी इस फैसले की जानकारी इससे पहले नहीं मिली है, ताकि गोपनीयता बरकरार रहे। इसलिए बैंक और डाकघर जैसी वित्तीय संस्थाओं को कम समय में ज्यादा काम करना है।
-इस कारण 9 नवंबर को डाकघर और बैंक बंद रहेंगे।
-31 मार्च 2017 तक घोषणा पत्र के साथ RBI में जमा कर सकते हैं पुराने नोट।
-बाकी ऑनलाइन ट्रांजैक्शन पहले की तरह ही चलता रहेगा।
-अब 2000 रुपये के नोट और 500 के नए डिजाइन के नोटों को सर्कुलेशन में लाया जाएगा।
-सरकार ने रिजर्व बैंक के 2000 रुपये के नोटों के सर्कुलेशन का प्रस्ताव स्वीकार किया है।
-अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डों पर विदेश से आ रहे या जा रहे लोगों के पास यदि पुराने नोट हैं तो ऐसे नोटों की 5000 रुपये तक की राशि को नये और मान्य नोटों से बदलने की सुविधा दी जाएगी।
-सार्वजनिक क्षेत्र के पेट्रोल और सीएनजी गैस स्टेशन पर भी 11 नवंबर की रात 12 बजे तक पुराने नोट स्वीकार करने की छूट होगी।
-इसी तरह 72 घंटों तक रेलवे के टिकट बुकिंग काउंटर, सरकारी बसों के टिकट बुकिंग काउंटर और हवाई अड्डों पर भी केवल टिकट खरीदने के लिए पुराने नोट मान्य होंगे

Monday, 7 November 2016

खतरे में डॉल्फिन का जीवन

 'समुद्र की मुन्नी" जी हां, डॉल्फिन को समुद्र की मुन्नी कहा जाये तो शायद कोई अतिश्योक्ति न होगी। डॉल्फिन भले ही जल चर हो लेकिन मनुष्यों के साथ डॉल्फिन का कार्य-व्यवहार दोस्ताना होता है। विशेषज्ञों की मानें तो डॉल्फिन का विश्वास व सोच मनुष्यों की भांति ही होता है। अमूमन डॉल्फिन अकेले रहना पसंद नहीं करती क्योंकि उसे अकेलापन अच्छा नहीं लगता। लिहाजा डॉल्फिन समूह में रहती है। समूह में आैसत दस से बारह सदस्य होते हैं। डॉल्फिन सामान्यत: आवाज व ध्वनि तरंगों से एक दूसरे की पहचान करती हैं। खास बात यह होती है कि उसकी मुंह से निकली ध्वनि तरंगें अन्य जीव-जंतुओं से टकरा कर वापस लौट आती हैं जिससे डॉल्फिन के लिए यह जानना आसान हो जाता है कि शिकार कितना बड़ा व कितना करीब है। डॉल्फिन आपस में बातचीत करते हैं तो सीटियों की आवाज निकलती है। यूं कहा जाये कि उनकी बातचीत सीटियों की ध्वनि तरंगों पर आधारित होती है तो शायद कोई अतिश्योक्ति न होगी। डॉल्फिन के चलने की रफ्तार साठ किलोमीटर प्रति घंटा होती है। कभी कभी डॉल्फिन इससे भी अधिक रफ्तार में चलती हैं। खास बात यह है कि डॉल्फिन जल चर होती है लेकिन पानी के अंदर सास (श्वांस) नहीं लेती। सास लेने के लिए डाल्फिन हर दस से पन्द्रह मिनट पर पानी के उपर आती रहती है। डॉल्फिन की याददाश्त जबर्दस्त होती है। विशेषज्ञों की मानें तो डॉल्फिन बीस वर्ष के बाद भी ध्वनि तरंग को याद रखने में समर्थ होती है। कोई डॉल्फिन साथी बिछड़ जाये तो वर्षों बाद भी वह ध्वनि तरंगों से पहचान लेगी। डॉल्फिन पार्क  सबसे अधिक जापान में पाये जाते हैं। हालांकि थाईलैण्ड व सिंगापुर में भी काफी तादाद में डॉल्फिन पार्क हैं। डॉल्फिन पार्क में घूमने-फिरने आने-जाने वालों की संख्या बहुतायत में होती है। देश में डॉल्फिन  का अस्तित्व खतरे में माना जा रहा है क्योंकि डॉल्फिन की संख्या दिनो 
दिन कम होती जा रही है। देश में डॉल्फिन खास तौर से गंगा, उसकी सहायक नदियों व ब्राह्मपुत्र नदी में पायी जाती है।  इन नदियों की धाराओं में एक दशक पहले डॉल्फिन की संख्या आठ सौ से अधिक थी। बनारस में गंगा के घाटों पर भी पहले कभी-कभी डॉल्फिन दिख जाती थी लेकिन अब डॉल्फिन बनारस में गंगा के घाटों पर नहीं दिखती। शायद यही कारण रहा होगा जिससे कि डॉल्फिन का अस्तित्व संकट में देख कर भारत सरकार ने वर्ष 2010 में वन्य जीव संरक्षण अधिनियम के तहत डॉल्फिन को राष्ट्रीय जलीय जीव घोषित किया था। डॉल्फिन की आबादी या उनकी संख्या देख कर नदी की सेहत या उसके जल की शुद्धता का अनुमान लगाया जा सकता है। ऐसा नहीं है कि डॉल्फिन की अस्तित्व रक्षा के लिए देश में कहीं कुछ नहीं हो रहा है। बिहार की राज्य सरकार ने जलीय जीव डॉल्फिन के संरक्षण व अस्तित्व विकास के लिए डॉल्फिन शोध केन्द्र बनाने का एलान किया है। शोध एवं अनुसंधान के इसी क्रम में आस्ट्रेलिया में डॉल्फिन की एक नयी प्रजाति वैज्ञानिकों को मिली है। जिससे डॉल्फिन की वंश परम्परा को प्रोत्साहन व बल मिलेगा। डॉल्फिन की अस्तित्व रक्षा के लिए नदी में जल प्रवाह होने के साथ साथ गहराई भी होनी चाहिये क्योंकि नदी की गहराई व जल प्रवाह ही डॉल्फिन के जीवन का आधार है। डॉल्फिन इंसान का एक अच्छा दोस्त भी है। इसलिये डॉल्फिन के जीवन को बचाने के लिए नदियों में जल प्रवाह व जल की शुद्धता लाने की भी सार्थक कोशिश होनी चाहिए ताकि डॉल्फिन के साथ खुल कर मनोरंजन कर सकें।

Tuesday, 1 November 2016

मुश्लिम वोटों की सियासत....

देश में कई चिंतक और विचारक ऐसे है जो एक खास किश्म के चश्मे रखते हैं। चश्मे से वह अपना वोट बैंक देखते हैं तभी बोलते हैं और जब भी बोलते हैं तो वह जहर ही उगलते हैं। कश्मीर में एक महीने में 27 स्कूल जलाये गए बांग्लादेश में 19 मन्दिर जलाये गए कोई नहीं बोला,भोपाल जेल में तैनात रमाशंकर यादव की शहादत पर भी वो चुप रहे, J&K शहीद जवानों के घर कोई बड़ा नेता नहीं गया,कश्मीर में दर्जनों लोग मारे गए कोई नहीं बोला लेकिन देश के कथित महान विचारकों को ये चिंता खाये जा रही है कि सिमी के 8 आतंकवादियों की मौत कैसे हुई ? किसी भी घटना को सियासी रंग देकर वो सरकार को मुश्लिम विरोधी ठहराने की पुरजोर कोशिश करते हैं कुछ देश के पढ़े लिखे अनपढ़ मुश्लिम वोट पाने के लिए कुछ भी क गुजरने को तैयार हैं। इसी देश में कुछ लोग सुप्रीम कोर्ट के फैसले को भी नहीं मानते आतंकियो को मौत की सजा दिए जाने पर आतंकी प्रेमी गैंग मुश्लिम वोटों के लिए मातम मनाते हैं।

केवल मुँह से कब तक देंगे मुहतोड़ जवाब.....

आज पाकिस्तान की भारी गोलीबारी में 8 लोगों की मौत हो गयी और 21 लोग घायल हैं।भारत के जिम्मेदार लोग बस मुह से मुहतोड़ जवाब देते हैं।मुहतोड़ जवाब शब्द सुनते सुनते कान पक गया है मैं तो कहता हूं जो लोग इस शब्द का इस्तेमाल कर रहे हैं पाकिस्तान के खिलाफ जवाब देने में उनको दुबारा अध्ययन करने की जरूरत है। एक आम आदमी भी शब्द का अर्थ समझता है कि मुहतोड़ जवाब का मतलब है ऐसा जवाब देना जिससे दुश्मन फिर हिमाकत न कर पाये यानि परास्त कर देना। यहां क्या है जितना मुहतोड़ जवाब मुह से दिया जा रहा है पाकिस्तान अपना हमला उतना ही तेज कर रहा है। शर्म आनी चाहिए देश के बयानवीरों को।