Tuesday, 1 November 2016

मुश्लिम वोटों की सियासत....

देश में कई चिंतक और विचारक ऐसे है जो एक खास किश्म के चश्मे रखते हैं। चश्मे से वह अपना वोट बैंक देखते हैं तभी बोलते हैं और जब भी बोलते हैं तो वह जहर ही उगलते हैं। कश्मीर में एक महीने में 27 स्कूल जलाये गए बांग्लादेश में 19 मन्दिर जलाये गए कोई नहीं बोला,भोपाल जेल में तैनात रमाशंकर यादव की शहादत पर भी वो चुप रहे, J&K शहीद जवानों के घर कोई बड़ा नेता नहीं गया,कश्मीर में दर्जनों लोग मारे गए कोई नहीं बोला लेकिन देश के कथित महान विचारकों को ये चिंता खाये जा रही है कि सिमी के 8 आतंकवादियों की मौत कैसे हुई ? किसी भी घटना को सियासी रंग देकर वो सरकार को मुश्लिम विरोधी ठहराने की पुरजोर कोशिश करते हैं कुछ देश के पढ़े लिखे अनपढ़ मुश्लिम वोट पाने के लिए कुछ भी क गुजरने को तैयार हैं। इसी देश में कुछ लोग सुप्रीम कोर्ट के फैसले को भी नहीं मानते आतंकियो को मौत की सजा दिए जाने पर आतंकी प्रेमी गैंग मुश्लिम वोटों के लिए मातम मनाते हैं।

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