फेक न्यूज पर पत्रकारों की मान्यता रद्द करने संबंधी दिशानिर्देश पर सूचना प्रसारण मंत्रालय को किरकिरी झेलनी पड़ी है। महज 16 घंटे में पीएम ने फेक न्यूज पर स्मृति ईरानी का फैसला पलट दिया। कहा कि ऐसे मामलों पर प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया (पीसीआई) और न्यूज ब्राडकास्टर्स एसोसिएशन (बीसीए) जैसी संस्थाओं को ही फैसला लेना चाहिए। बता दें कि दिशानिर्देश में पहली बार फेक न्यूज देने के दोषी पाए जाने वाले पत्रकार की छह महीने के लिए मान्यता निलंबित करने, दूसरी बार दोषी पाए जाने पर एक साल के लिए और तीसरी बार दोषी पाए जाने पर हमेशा के लिए मान्यता रद्द करने का प्रावधान किया गया था। इससे पहले दिशानिर्देश को लेकर विपक्ष के साथ-साथ मीडिया से जुड़ी यूनियनों, वरिष्ठ पत्रकारों ने और विहिप ने सरकार की मंशा पर सवाल उठाए थे। सवाल यह भी था कि यह कौन तय करेगा कि क्या फेक न्यूज है? यह भी आशंका थी कि इसका इस्तेमाल ईमानदार पत्रकारों को प्रताड़ित करने के लिए किया जा सकता है। फेक न्यूज मुद्दे पर विपक्ष ने भी सरकार पर हमला बोला था और इसे अघोषित आपातकाल बताया था।

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