Saturday, 13 August 2016

आजादी का सफरनामा-गांधी से मोदी तक.....




स्वतंत्रता दिवस आने वाला है। यह जो आजादी हमें मिली उसके पीछे लम्बे संघर्षों और कुर्बानियों की कहानी हंै। फ्रांस के महान दार्शनिक रूसो ने बड़े दुख के साथ लिखा था कि ’मनुष्य तो स्वतंत्र पैदा हुआ है,किंतु वह सर्वत्र बंधनो में जकड़ा हुआ है।’रूसो का यह कथन फ्रांस की क्रांति का नेतृत्व वाक्य बना और 1779 में फ्रांस राजशाही से मुक्त हो गया। इसके बाद पुरी दुनिया में स्वतंत्रता की एक लहर चलनी शुरू हो गयी। भारत तक इस लहर को पहुंचने में लगभग डेढ़ सौ साल लग गये और 1947 में भारत को आजादी मिली। आजादी के लिए भारत माता के लाखों वीर सपूतों ने अपनी कुर्बानियां दी। कितनों से पिता का साया छिन गया, किसी की मांग सुनी हो गयी तो किसी के घर का चिराग बुझ गया। आजादी मिलने के बाद गांधी जी ने एक तरफ जहां कोई पद लेने से इंकार कर दिया वहीं आज मोदी जी स्वयं को प्रधानमंत्री नही प्रधान सेवक कहते हैं। अभी हम 70 वां स्वतंत्रता दिवस मनाने वाले हैं कुछ लोग आजादी का अर्थ अपनी मनमर्जी करने से निकालते है लेकिन ऐसा नही है हमारी स्वतंत्रता वहीं तक है जहां तक किसी और की स्वतंत्रता प्रभवित न हो। संविधान मे हमें जहां एक तरफ कई तरह की स्वतंत्रता दी गयी है वहीं दुसरी तरफ उस पर युक्तियुक्त प्रतिबंध भी लगाया गया है। इसलिए हमें स्वतंत्रता का उपयोग मनमर्जी करने में नही बल्कि स्वयं के विकास और देशहित में करना चाहिए। पिछले कुछ समय से चन्द मुठ्ठी भर लोग अपनी स्वतंत्रता का दुरूपयोग करके देश की एकता एवं अखण्डता को नुकसान पहुंचाने की कोशिश करते रहे हैं जो किसी भी कीमत पर बर्दास्त करने योग्य नही है। भारत की वर्तमान पीढ़ी और आने वाली पीढ़ी को आजादी की कीमत समझनी होगी। भारत दुनिया का सबसे युवा देश है। युवाओं की शक्ति का सही उपयोग करने के लिए उन्हे उचित प्लेटफार्म और सही मार्गदर्शन देने की जरूरत है। भारत एक ऐसा देश है जिसकी पहचान अनेकता में एकता की हैै। यह शान्ति तथा वसुधैव कुटुम्बम के सुत्र में विश्वास करता है। स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद तीसरी पीढ़ी जवान हो रही है लेकिन बड़ा सवाल यही है कि क्या इसके लिए भी आजादी कीमत वहीं है जो उस दौर के लोगों के लिए थी। मुझे लगता है शायद नही। उस दौर के लोगांे में भारत माता की जय बोलने पर एक अजीब सी उर्जा का संचार होता था और वे अपने देश के लिए कुछ भी करने को तैयार रहते थे। लोग तिरंगे को हाथ में लेकर गोलियों से छलनी हो जाते फिर भी मरते दम तक उसे जमीन पर गिरने नही देते,एक लुढ़कता तब तक दुसरा थाम लेता। आज के समय में कुछ लोग ऐसे हैं जिनको भारत माता की जय कहने शर्म आती है। कुछ लोग हमारे तिरंगे को जलाते है,पाकिस्तानी झण्डा फहराते हैं और भारत की बर्बादी के नारे लगाते हैं। मैं समझता हुं कि इनको कड़ा सबक सिखाने की जरूरत है। यहां मैं यह स्पष्ट कर देना चाहता हुं कि मुझे भारतीयों की देशभक्ति पर कोई शक नही है। देश के कुछ गद्दार राष्ट्र की एकता एवं अखण्डता को नुकसान पहुंचाना चाहते हैं। गांधी जी ने देश को आजादी दिलाने के लिए सत्य और अहिंसा को अपना हथियार बनाया और आजादी मिलने तक अनवरत अपना संघर्ष जारी रखा। यहां गाांधी जी की बात कर मैं और लोगों के आजादी में दिये योगदान की उपेछा नही करना चाहता सभी का योगदान अतुल्य है लेकिन गांधी जी इस स्वतंत्रता आन्दोलन के सूत्रधार रहे। आजादी के 70 साल पुरे होने को हैं प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत अन्तराष्ट्रीय मंच पर नित्य नई उंचाईयां छू रहा है हां भारत को यहां तक लाने में पिछली सरकारों के भी महत्वपूर्ण योगदान हैं। आज मादीे सरकार जो इमारत बना रही है उसकी नींव भरने का काम पिछली सरकारों ने ही किया है। गाांधी से लेकर मोदी तक के इस 70 साल के सफरनामे में देश ने कई उतार-चढ़ाव देखे। जहां एक तरफ आज 21 वीं सदी में देश तमाम बाधाओं और आशंकाओं को दूर करते हुए दुनिया की सबसे तेज गति से विकास करने वाली अर्थव्यवस्था बन चुका है और दुनिया मंे एक ताकतवर देश के रूप में अपनी पहचान स्थापित कर रहा है। वहीें दुसरी तरफ गरीबी,बेरोजगारी और कुपोषण जैसे अभिषापांे से देश पुरी तरह से निपटने में असमर्थ रहा है। कुल मिलाकर पुरी दुनिया यह मानती है कि 21 वीं सदी एशिया की है खासतौर से भारत और चीन की। पूरी दुनिया भारत की तरफ देख रही है भारत के लिए पुरा मौका है बस जरूरत है तो सही नीति और नियत की।  

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