Sunday, 21 August 2016

सावधान ! सेल्फी से सेल्फाइटिस का खतरा

स्मार्टफोन ने युवापीढ़ी की जिंदगी को ही बदल दिया है ।सेल्फी का क्रेज युवाओं के सर चढ़कर बोल रहा है सेल्फी शब्द लोगों की जुबान पर ऐसे चढ़ा की उतरने का नाम ही नहीं ले रहा है 2013 में तो इसे ऑक्सफोर्ड वर्ड ऑफ़ द ईयर बना दिया गया एक अनुमान के मुताबिक पिछले सालों के मुकाबले इसका प्रयोग 1700 गुना ज्यादा बार किया गया । बाइक या स्कूटी चलाते हुए,नदियों की लहरों पर नौकाविहार के दौरान,चलती ट्रेन ,आटो,बस आदि से यात्रा के वक्त किसी उंची इमारत पर खड़े होकर आदि तरीकों से सेल्फी लेना( मोबाइल से खुद की फोटो लेना ) आज के युवाओं का पसंदीदा शौक  बनता जा रहा है। एक नए अध्ययन में यह बात सामने आयी है कि लड़कियां एक हफ्ते में पांच घंटे सेल्फी लेने में बिताती हैं अध्ययन में यह पाया गया कि अच्छी सेल्फी लेने में इतना समय मेकअपऔर अच्छे एंगल की तलाश में लगता है ।इतना ही नही दिन भर में कई बार अपनी फोटो को खींचकर सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर पोस्ट करना एवं लाइक या कमेंट का इंतजार करना युवाओं की दिनचर्या का हिस्सा बन चुका है। लाइक या कमेंट न मिलने या कम मिलने पर उनके अंदर चिड़चिड़ापन या बेचैनी जैसी समस्या पायी जा रही है। अगर आप भी सेल्फीबाज हैं तो सावधान हो जाइये। अमेरिकन एसोसिएशन आफ साइकियाट्रिक ने  सेल्फी की लत को “सेल्फाइटिस” नामक बीमारी घोषित  किया है। सेल्फाइटिस के लक्षणों में बार -बार खुद की ही फोटो खींचना और उसे सोशल साइटस पर पोस्ट करना पीड़ित की मजबूरी सी बन जाती है। ऐसे लोगों के मन में फोटो को लेकर विचारों की बाढ़ सी आ जाती है जैसे ये फोटो ज्यादा अच्छा नही है दूसरा खींचते हैं,मेरे फोटो पर लाइक और कमेंट कम मिले क्यों आदि जैसे तमाम सवाल व्यक्ति के मन में आते रहते हैं और उसके स्वभाव मे व्याकुलता एवं चिड़चिड़ापन पैदा कर देते हैं। कुछ तो मामले ऐसे भी सामने आये जिसमे व्यक्ति शोकाकुल माहैाल में भी खुद को सेल्फी लेने से नही रोक पाये। मनोचिकित्सकों का मानना है कि शोकाकुल माहौल में सेल्फी लेना एक असभ्य एवं संवेदनहीन व्यवहार है। अभी कुछ दिनों पहले मुम्बई पुलिस ने 16 जगहों को "नो सेल्फी जोन "घोषित किया है यह कदम सेल्फी लेने के दौरान कई लोगों की मौत हो जाने के कारण उठाया गया है । दुनिया में 2015 में सेल्फी की वजह से कुल 27 मौतों में से 15 मौतें अकेले भारत में हुई ।कुछ शोधों  में यह भी पता चला है है की स्क्रीन की नीली रोशनी त्वचा को नुकसान पहुँचा  सकती है ।अगर आप भी ऐसी आदत के शिकार हैं तो सावधान
हो जाइये क्योंकि आप भी अनजाने में सेल्फाइटिस जैसे मानसिक रोग की गिरफ्त में आ रहे हैं । किशोरों एवं युवाओं में यह मनोरोग तेजी से पांव पसार रहा है।

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