अगर आप ट्रेन से सफर कर रहे हैं और आप अकेले हों तो सफर काफी उबाउं लगता है ऐसा मैंने अनुभव किया है। नोटेबन्दी 2016 का सबसे चर्चित मुद्दा रहा और इसका असर काफी व्यापक और दीर्घकालीन होने वाला है।ट्रेन में सफर करने के दौरान कुछ लोग नोटेबन्दी पर चर्चा छेड़ देते हैं। कुछ लोग पक्ष में तो कुछ विपक्ष में लगे तर्क देने। दोनों पक्ष के लोग अपने विचार और तर्क को सही ठहराने के लिए कुतर्क देने से भी बाज नहीं आ रहे थे तर्क और कुतर्क भी ऐसे की उनके शिक्षित होने पर भी संदेह हो रहा था एक सज्जन का कुतर्क था मोदी चोर है तभी उसने नोटबंदी कर दी चोर ही चोरी का हाल जानता है कहावत मारकर उन्होंने अपनी बात को सिद्ध करने की कोशिश की एक और आदमी बोला मोदी ने नोटबंदी से पहले अपना और पार्टी का कालाधन सफ़ेद कर दिया। दूसरे पक्ष के सज्जन ने कहा मोदी ने नोटबंदी कर अच्छा किया अबतक जितने नेता हुये ओ डरते थे उन्हें देश नही वोट की चिंता थी। तभी एक सज्जन बोले नोबंदी से गरीब और किसान परेशान हुए अमीरों को तो कुछ नहीं हुआ। लोगों के विचार मैं काफी ध्यान से सुन रहा था विद्वानों की बहस में शामिल होना उचित नहीं समझा। हमारे पास ही बैठे एक नवयुवक ने कुछ कहने की कोशिश की तो उन स्वकथित विद्वानों ने कहा "बेटा जब दो बड़े बात करें तो छोटो को नही बोलना चाहिए। मैं तो मन ही मन मुस्कुरा रहा था,करता भी क्या बड़ों की संस्कारशाला और तानाशाही के आगे लोकतंत्र और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता बौनी पड़ गयी और चंद लोगों ने मुकदमा चला कर फैसला सुना डाला किसी ने मोदी को दोषी माना तो किसी ने देशभक्त और नायक।
Friday, 30 December 2016
Saturday, 19 November 2016
रिजर्व बैंक की गाईडलाइन: अगर आप नये नोट पर कुछ भी लिखते हैं तो उसे बैंक नही लेगें।
अगर आप नए नोट पर कुछ भी लिखते हैं तो उस नोट की कोई वैल्यू नहीं होगी। अर्थात नए लिखे हुए नोट बैंक नहीं लेगा। भारतीय रिवर्ज बैंक ने सभी बैंकों को सर्कुलर जारी किया है। इसमें लिखे हुए नए नोटों को न लेने के सख्त निर्देश दिए गए हैं। उल्लेखनीय है कि अब बैंकों में नोट गिनने की नई मशीनें आ रही हैं।
ये मशीनें उन नोटों को स्वीकार ही नहीं करेगी, जिन नोटों के ऊपर कुछ लिखा होगा। हालांकि, सूबे में अभी तक 2000 रुपये का नोट बाजार में आया है, लेकिन निर्देशों में 500 और 2000 रुपये के नए नोटों का जिक्र किया गया है। इसमें न लिखने की सख्त लोगों को भी हिदायत दी गई है।
गिनने वाली मशीनें भी नहीं करेंगी स्वीकार
लगभग सभी बैंकों के कर्मचारी लोगों को नए नोट देने से पहले जागरूक कर रहे हैं कि नए नोट पर कुछ भी न लिखें। लिखने से नोट बर्बाद भी हो सकता है, क्योंकि नए नोटों को गिनने वाली मशीनें इस स्वीकार नहीं करेंगी। एसबीआई मंडी के मुख्य प्रबंधक प्यार सिंह
ने कहा कि नए नोटों पर कुछ लिखा होगा तो उस नोट को नहीं लिया जाएगा। इस बारे में आरबीआई की ओर से सर्कुलर आया है। इसमें लिखे हुए नए नोटों को न लेने की हिदायत दी गई है। सभी एसबीआई और अन्य बैंकों के प्रबंधकों को इस बारे अवगत करवा दिया है।
साभार-अमरउजाला
Wednesday, 9 November 2016
मोदी की एक और सर्जिकल स्ट्राइक...
राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बड़ा ऐलान किया है। उन्होंने कहा है कि 8 नवंबर-9 नवंबर की मध्यरात्रि से 500 और 1000 के नोट बंद हो जाएंगे। पीएम ने कहा, '500 और 1000 रुपये के पुराने नोट 10 नवंबर से 30 दिसंबर 2016 तक आप अपने बैंक या डाकघर के खाते में जमा करवा सकते हैं।'
जनता को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि आपकी धनराशि आपकी ही रहेगी, आपको कोई चिंता करने की जरूरत नहीं है। किसी कारणवश अगर आप 30 दिसंबर तक ये नोट जमा नहीं कर पाए, तो आपको एक आखिरी अवसर भी दिया जाएगा। आपके पास 50 दिनों का समय है।
500 और 1000 के नोटों के अलावा बाकी सभी नोट और सिक्के नियमित हैं और उनसे लेन-देन हो सकता है।
मुख्य बातें:
-देश में किसी को भी इस फैसले की जानकारी इससे पहले नहीं मिली है, ताकि गोपनीयता बरकरार रहे। इसलिए बैंक और डाकघर जैसी वित्तीय संस्थाओं को कम समय में ज्यादा काम करना है।
-इस कारण 9 नवंबर को डाकघर और बैंक बंद रहेंगे।
-31 मार्च 2017 तक घोषणा पत्र के साथ RBI में जमा कर सकते हैं पुराने नोट।
-बाकी ऑनलाइन ट्रांजैक्शन पहले की तरह ही चलता रहेगा।
-अब 2000 रुपये के नोट और 500 के नए डिजाइन के नोटों को सर्कुलेशन में लाया जाएगा।
-सरकार ने रिजर्व बैंक के 2000 रुपये के नोटों के सर्कुलेशन का प्रस्ताव स्वीकार किया है।
-अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डों पर विदेश से आ रहे या जा रहे लोगों के पास यदि पुराने नोट हैं तो ऐसे नोटों की 5000 रुपये तक की राशि को नये और मान्य नोटों से बदलने की सुविधा दी जाएगी।
-सार्वजनिक क्षेत्र के पेट्रोल और सीएनजी गैस स्टेशन पर भी 11 नवंबर की रात 12 बजे तक पुराने नोट स्वीकार करने की छूट होगी।
-इसी तरह 72 घंटों तक रेलवे के टिकट बुकिंग काउंटर, सरकारी बसों के टिकट बुकिंग काउंटर और हवाई अड्डों पर भी केवल टिकट खरीदने के लिए पुराने नोट मान्य होंगे
Monday, 7 November 2016
खतरे में डॉल्फिन का जीवन
Tuesday, 1 November 2016
मुश्लिम वोटों की सियासत....
देश में कई चिंतक और विचारक ऐसे है जो एक खास किश्म के चश्मे रखते हैं। चश्मे से वह अपना वोट बैंक देखते हैं तभी बोलते हैं और जब भी बोलते हैं तो वह जहर ही उगलते हैं। कश्मीर में एक महीने में 27 स्कूल जलाये गए बांग्लादेश में 19 मन्दिर जलाये गए कोई नहीं बोला,भोपाल जेल में तैनात रमाशंकर यादव की शहादत पर भी वो चुप रहे, J&K शहीद जवानों के घर कोई बड़ा नेता नहीं गया,कश्मीर में दर्जनों लोग मारे गए कोई नहीं बोला लेकिन देश के कथित महान विचारकों को ये चिंता खाये जा रही है कि सिमी के 8 आतंकवादियों की मौत कैसे हुई ? किसी भी घटना को सियासी रंग देकर वो सरकार को मुश्लिम विरोधी ठहराने की पुरजोर कोशिश करते हैं कुछ देश के पढ़े लिखे अनपढ़ मुश्लिम वोट पाने के लिए कुछ भी कर गुजरने को तैयार हैं। इसी देश में कुछ लोग सुप्रीम कोर्ट के फैसले को भी नहीं मानते आतंकियो को मौत की सजा दिए जाने पर आतंकी प्रेमी गैंग मुश्लिम वोटों के लिए मातम मनाते हैं।
केवल मुँह से कब तक देंगे मुहतोड़ जवाब.....
आज पाकिस्तान की भारी गोलीबारी में 8 लोगों की मौत हो गयी और 21 लोग घायल हैं।भारत के जिम्मेदार लोग बस मुह से मुहतोड़ जवाब देते हैं।मुहतोड़ जवाब शब्द सुनते सुनते कान पक गया है मैं तो कहता हूं जो लोग इस शब्द का इस्तेमाल कर रहे हैं पाकिस्तान के खिलाफ जवाब देने में उनको दुबारा अध्ययन करने की जरूरत है। एक आम आदमी भी शब्द का अर्थ समझता है कि मुहतोड़ जवाब का मतलब है ऐसा जवाब देना जिससे दुश्मन फिर हिमाकत न कर पाये यानि परास्त कर देना। यहां क्या है जितना मुहतोड़ जवाब मुह से दिया जा रहा है पाकिस्तान अपना हमला उतना ही तेज कर रहा है। शर्म आनी चाहिए देश के बयानवीरों को।
Friday, 28 October 2016
खुला खत.....यूपी पुलिस की कार्यप्रणाली पर सीएम और डीजीपी के नाम...
खुला खत...
सेवा में
अखिलेश यादव मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश सरकार और डीजीपी जावेद अहमद यूपी पुलिस,
महोदय,
मैंने अंग्रेजों की गुलामी और अत्याचारों को तो नहीं देखा लेकिन जैसा मैंने किताबों में पढ़ा और लोगों से सुना उस दौर की पीड़ा और अत्याचार की झलक यूपी पुलिस के व्यवहार में साफ दिखाई देती है। जिससे लोगों को हमेशा दो चार होना पड़ता है। श्रीमान जी यूपी पुलिस को नैतिकता और लोगों की गरिमा का सम्मान करना सीखाना होगा। आप लोगों के तमाम दावों और वादों पर यूपी पुलिस पानी फेर देती है। ये लोग जब भी बोलेंगे उसमे अगर गाली और गुस्सा न हो यह दुनिया का बड़ा आश्चर्य होगा। भ्रष्टाचार और अत्याचार तो इनकी रगों में भरा पड़ा है। दो-चार अच्छे कामों पर इनके कारनामे पानी फेर देते है गांव और समाज में अभी भी पुलिस का खौफ अंग्रेजों के ज़माने वाला ही है। लोगों के जेहन में पुलिस का नाम आते ही सिहरन सी हो जाती है। पुलिस को पब्लिक से जोड़ने के दावों की हवा निकल चुकी है। समझ में नहीं आता की कानून की रखवाली के नाम पर पुलिस को गैर कानूनी काम करने का अधिकार किसने दे दिया। मानवाधिकारों,कोर्ट के आदेशों तथा तमाम रूल और रेगुलेशन की धज्जियां उड़ाकर पुलिस अपनी तानाशाही दिखाती है जिससे कई बार हम भी दो चार हो चुके हैं। भारत जैसे बड़े लोकतान्त्रिक देश में पुलिस के अमानवीय कारनामे बेहद शर्म की बात है। मुझे समझ में नहीं आता कि उपर के बड़े पुलिस अफसरों और सत्ता में बैठे जिम्मेदारों को यह सब पता नहीं है या उन्हें सब कुछ पता है और वे बेबस है कुछ कर नहीं पाते। कारण चाहे जो कुछ भी हो लेकिन इसका खामियाजा आम लोगों को अपना गौरव और सम्मान देकर चुकाना पड़ता है। जो सही मायने में अपराधी और माफिया है उनके आगे पुलिस बेबस है। पुलिस अपनी मर्दानगी गरीबो,मजदूरों या आम बेसहायों पर दिखाती है। लोगों के गरिमापूर्ण जिंदगी जीने और स्वतंत्रता के अधिकारों को पुलिस ने बेमानी साबित कर दिया है। एक कहावत है समरथ को नहीं नाथ गोसाई। यानि अगर आपके पास पैसा है पावर है आप समर्थ हैं तो आपके लिए सबकुछ जायज है पुलिस भी इनके साथ अतिथियों जैसे पेश आती है। वही गरीब ,मजदुर और असहायों के साथ पुलिस अपनी मर्दानगी दिखाती है कभी कभी तो क्रूरता की हदों को भी पार कर देती है कानूनी धाराएं लादने में इनका कोई शान ही नहीं है। पुलिस के रवैये से आम आदमी काफी भयभीत रहता है और वह कभी पुलिस के पचड़े में नहीं पड़ना चाहता,कई बार तो लोग पुलिस के डर से ही घायलो को अस्पताल पहुचाने का भी साहस नहीं जुटा पाते। पुलिस की जो छवि है वह किसी से छुपी नहीं है हकीकत सबको मालूम है लेकिन समाधान कब और कैसे होगा किसी को नहीं पता। सरकारें बदलती रहीं अगर कोई चीज नहीं बदली तो वह है पुलिस की छवि और कार्यप्रणाली। पुलिस विभाग में अच्छे लोग नहीं है ऐसी बात नहीं है लेकिन अच्छे लोगों की छवि और मेहनत पर पानी फेरने के लिए उससे कई गुना ज्यादा लोग हैं। मैं चाहता हूँ कि लोगों के मानवाधिकार और गरिमा की रक्षा हर हाल में सुनिश्चित की जाये और इसके लिये सभी जरुरी कदम उठाये जायें।
धन्यवाद
आपका- धर्मपाल यादव