Saturday, 13 August 2016

आजादी का सफरनामा-गांधी से मोदी तक.....




स्वतंत्रता दिवस आने वाला है। यह जो आजादी हमें मिली उसके पीछे लम्बे संघर्षों और कुर्बानियों की कहानी हंै। फ्रांस के महान दार्शनिक रूसो ने बड़े दुख के साथ लिखा था कि ’मनुष्य तो स्वतंत्र पैदा हुआ है,किंतु वह सर्वत्र बंधनो में जकड़ा हुआ है।’रूसो का यह कथन फ्रांस की क्रांति का नेतृत्व वाक्य बना और 1779 में फ्रांस राजशाही से मुक्त हो गया। इसके बाद पुरी दुनिया में स्वतंत्रता की एक लहर चलनी शुरू हो गयी। भारत तक इस लहर को पहुंचने में लगभग डेढ़ सौ साल लग गये और 1947 में भारत को आजादी मिली। आजादी के लिए भारत माता के लाखों वीर सपूतों ने अपनी कुर्बानियां दी। कितनों से पिता का साया छिन गया, किसी की मांग सुनी हो गयी तो किसी के घर का चिराग बुझ गया। आजादी मिलने के बाद गांधी जी ने एक तरफ जहां कोई पद लेने से इंकार कर दिया वहीं आज मोदी जी स्वयं को प्रधानमंत्री नही प्रधान सेवक कहते हैं। अभी हम 70 वां स्वतंत्रता दिवस मनाने वाले हैं कुछ लोग आजादी का अर्थ अपनी मनमर्जी करने से निकालते है लेकिन ऐसा नही है हमारी स्वतंत्रता वहीं तक है जहां तक किसी और की स्वतंत्रता प्रभवित न हो। संविधान मे हमें जहां एक तरफ कई तरह की स्वतंत्रता दी गयी है वहीं दुसरी तरफ उस पर युक्तियुक्त प्रतिबंध भी लगाया गया है। इसलिए हमें स्वतंत्रता का उपयोग मनमर्जी करने में नही बल्कि स्वयं के विकास और देशहित में करना चाहिए। पिछले कुछ समय से चन्द मुठ्ठी भर लोग अपनी स्वतंत्रता का दुरूपयोग करके देश की एकता एवं अखण्डता को नुकसान पहुंचाने की कोशिश करते रहे हैं जो किसी भी कीमत पर बर्दास्त करने योग्य नही है। भारत की वर्तमान पीढ़ी और आने वाली पीढ़ी को आजादी की कीमत समझनी होगी। भारत दुनिया का सबसे युवा देश है। युवाओं की शक्ति का सही उपयोग करने के लिए उन्हे उचित प्लेटफार्म और सही मार्गदर्शन देने की जरूरत है। भारत एक ऐसा देश है जिसकी पहचान अनेकता में एकता की हैै। यह शान्ति तथा वसुधैव कुटुम्बम के सुत्र में विश्वास करता है। स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद तीसरी पीढ़ी जवान हो रही है लेकिन बड़ा सवाल यही है कि क्या इसके लिए भी आजादी कीमत वहीं है जो उस दौर के लोगों के लिए थी। मुझे लगता है शायद नही। उस दौर के लोगांे में भारत माता की जय बोलने पर एक अजीब सी उर्जा का संचार होता था और वे अपने देश के लिए कुछ भी करने को तैयार रहते थे। लोग तिरंगे को हाथ में लेकर गोलियों से छलनी हो जाते फिर भी मरते दम तक उसे जमीन पर गिरने नही देते,एक लुढ़कता तब तक दुसरा थाम लेता। आज के समय में कुछ लोग ऐसे हैं जिनको भारत माता की जय कहने शर्म आती है। कुछ लोग हमारे तिरंगे को जलाते है,पाकिस्तानी झण्डा फहराते हैं और भारत की बर्बादी के नारे लगाते हैं। मैं समझता हुं कि इनको कड़ा सबक सिखाने की जरूरत है। यहां मैं यह स्पष्ट कर देना चाहता हुं कि मुझे भारतीयों की देशभक्ति पर कोई शक नही है। देश के कुछ गद्दार राष्ट्र की एकता एवं अखण्डता को नुकसान पहुंचाना चाहते हैं। गांधी जी ने देश को आजादी दिलाने के लिए सत्य और अहिंसा को अपना हथियार बनाया और आजादी मिलने तक अनवरत अपना संघर्ष जारी रखा। यहां गाांधी जी की बात कर मैं और लोगों के आजादी में दिये योगदान की उपेछा नही करना चाहता सभी का योगदान अतुल्य है लेकिन गांधी जी इस स्वतंत्रता आन्दोलन के सूत्रधार रहे। आजादी के 70 साल पुरे होने को हैं प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत अन्तराष्ट्रीय मंच पर नित्य नई उंचाईयां छू रहा है हां भारत को यहां तक लाने में पिछली सरकारों के भी महत्वपूर्ण योगदान हैं। आज मादीे सरकार जो इमारत बना रही है उसकी नींव भरने का काम पिछली सरकारों ने ही किया है। गाांधी से लेकर मोदी तक के इस 70 साल के सफरनामे में देश ने कई उतार-चढ़ाव देखे। जहां एक तरफ आज 21 वीं सदी में देश तमाम बाधाओं और आशंकाओं को दूर करते हुए दुनिया की सबसे तेज गति से विकास करने वाली अर्थव्यवस्था बन चुका है और दुनिया मंे एक ताकतवर देश के रूप में अपनी पहचान स्थापित कर रहा है। वहीें दुसरी तरफ गरीबी,बेरोजगारी और कुपोषण जैसे अभिषापांे से देश पुरी तरह से निपटने में असमर्थ रहा है। कुल मिलाकर पुरी दुनिया यह मानती है कि 21 वीं सदी एशिया की है खासतौर से भारत और चीन की। पूरी दुनिया भारत की तरफ देख रही है भारत के लिए पुरा मौका है बस जरूरत है तो सही नीति और नियत की।  

मेरे पास सुषमा हैं .....

दूसरे देशों में फंसे भारतीयों के लिए मेादी सरकार में विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ‘तारणहार‘ की भूमिका निभा रही हैं। पहले यमन, लीबिया, दक्षिणी सूडान में फंसे भारतीयों को सुरक्षित निकालने के त्वरित
प्रयास कीे देश-विदेश में खूब सराहना हूई। पाकिस्तान से गीता की स्वदेश वापसी हो या अब सऊदी अरब में फंसे दस हजार भारतीयों के खाने-पीने की व्यवस्था से लेकर स्वदेश वापसी के इंतजामों को लेकर वह चर्चा में रही हैं। सुषमा भारतीयों की छोटी से छोटी समस्याओं को हल करने में भी संकोच नही करतीं। उनके ट्वीट एवं टिप्पणीयां काफी जिम्मेदारीपूर्ण होती हैं। कई मामले ऐसे भी आए जब उन्होनें पीड़ितों तक कुछ ही घंटों मंे मदद पहुंचाई। सोशल मीडिया पर लगातार एक्टिव रहना, टैग की गयी हर चीज पर नजर रखना और हाजिरजवाबी सुषमा को दूसरे नेताओं से अलग करती है। विदेश मंत्री ने अभी तीन दिन पहले एक व्यक्ति की कार क्षतिग्रस्त होने की शिकायत पर उसकी मदद की, उन्होने पत्नी का पासपोर्ट न बन पाने के कारण अकेले हनीमून पर गये नवविवाहित की मदद करने में भी जरा देर नही लगायी। मैं समझता हूं कि यह देश के इतिहास में पहली बार हो रहा है।इसलिए प्रत्येक भारतीय यह गर्व से कह सकता है कि मेरे पास सुषमा हैं चाहे कोई सात समुन्दर पार हो या पास पडोस  उसकी मदद के लिए भारतीय विदेश मंत्री हमेशा तैयार रहती हैं 

Wednesday, 6 July 2016

सियासत,केजरीवाल और मीडिया....



इस देश में एक ही राजनीतिक दल ऐसा है जिसका गठन,प्रचार और लोकप्रियता शुरू से ही मीडिया पर निर्भर रही है। यह दल है आम आदमी पार्टी। अरविंद केजरीवाल यूपीए सरकार के भ्रष्टाचार के खिलाफ शुरू हुए आन्दोलन मे शमिल थे। अन्ना हजारे की भ्रष्टाचार के खिलाफ पहल को लोगों और मीडिया ने हाथांे-हाथ लिया था। टीवी और सोशल मीडिया पर लगातार प्रचार के कारण ही देश के आम लोग अन्ना हजारे के गुण गाने लगे थे। उन दिनो अन्ना के साथी रहे केजरीवाल ने यह समझ लिया की सोशल मीडिया के आधुनिक औजारों का इस्तेमाल करके लोगों पर कैसे प्रभाव डाला जा सकता हैं। इसके बाद उन्होने आम आदमी पार्टी का गठन किया और दिल्ली के मुख्यमंत्री बनेे। केजरीवाल ने अपने 49 दिन के शासनकाल मे चर्चा में बने रहने के लिए तमाम हथकण्डे अपनाये कुछ मुद्दों को लेकर केजरीवाल ने दिल्ली की गद्दी छोड़ दी,उन्हे भगोड़ा भी कहा गया। दिल्ली का दुबारा सीएम बनने के बाद केजरीवाल फिर मीडिया में नायक बन गये। दुसरी बार भी केजरीवाल सरकार का केन्द्र सरकार से हमेशा टकराव की स्थिति ही रही। पिछले ही साल दिल्ली मे उन्होने आॅड-ईवन की शुरूआत की तो अनेक लोगों ने उनकी इस उटपटांग चाल का स्वागत किया,बावजूद इसके कि कुछ ही दिनों में यह साबित हो गया कि यातायात पर प्रतिबन्ध लगाने से दिल्ली के प्रदुषण पर कोई प्रभाव नही पड़ा। आज दिल्ली के मुख्यमंत्री येनकेन प्रकरेण सुर्खियों में बने रहने के मामले में नायक बने हुए हैं वावजूद इसके कि उनके आने से दिल्ली वालों के जीवन में कोई खास फर्क नहीं पड़ा है। केजरीवाल राजनीति मे आए तो थे भ्रष्टाचार मिटाने, नई राजनीति की शुरूआत करने लेकिन अब उन बातों को भुला दिया गया है। उन्होने नई तरह की राजनीति की नीव भले ही न रखी पर यह जरूर बता दिया कि आधुनिक सियासत में मीडिया की भूमिका कितनी महत्वपूर्ण है।

Monday, 18 April 2016

कलम के सिपाही अगर सो गए तो वतन के मसीहा वतन बेच देंगे....


गगन बेच देंगे,पवन बेच देंगे,चमन बेच देंगे,सुमन बेच देंगे.कलम के सिपाही अगर सो गए तो वतन के मसीहा वतन बेच देंगे”. कलम के सिपाहियों की ये जिम्मेवारी दी गई है की वतन और देश के मसीहा पर पैनी नजर रखें. सत्ता के सताए लोग जब चारो तरफ से निराश हो जाते हैं तब मिडिया और मिडिया के लोग किसी देव दूत की भांति उस आम आदमी की आवाज़ उठाते हैं. एक बेसहारा के उपर हो रहे अन्याय में शामिल लोगों की जम कर आलोचना करते हैं. मिडिया का काम अत्याचार करना नहीं है. मिडिया का काम शोषण करना भी नहीं है. मिडिया का काम तो अत्याचार और शोषण के खिलाफ आवाज उठाना है.. लेकिन कभी-कभी मिडिया में गलत लोगों के प्रवेश से पूरा मिडिया वर्ग ही संदेह के घेरे में आ जाता है. जनता मिडिया को संदेह भरी नज़रों से देखने लगती है|मीडिया को किसी लालच में न आकर उसे अपना काम  जिम्मेदारी के साथ करना चाहिए । मीडिया की जिम्मेदारी वाच डॉग की है उसे विधायिका , कार्यपालिका  और न्यायपालिका की निगरानी करनी चाहिए और जहां कुछ गलत हो रहा है उसे उजागर करना चाहिए । मीडिया को
 जिम्मेदारी के साथ अपने कर्तव्यों  का निर्वहन करना चाहिए । 

Friday, 18 March 2016

जल है तो जहान है...


जल हमारे जीवन के लिए कितना महत्वपूर्ण है यह बात सभी लोग जानते हैं | दुनिया के कई देशों और इलाकों में उपजे भारी जल संकट को देखते हुये यह बात कही जाने लगी है कि अगला विश्व युद्ध जल को लेकर हो सकता है | हमारी धरती का 71 फीसदी हिस्सा जल से ढका हुआ है | जल से ढके भाग का 97 फीसदी महासागरों में, 2 फीसदी ध्रुवों की बर्फ और ग्लेशियर में तथा बाकि हिस्सा नदियों,तालाबो,झीलों तथा भूमिगत जल के रूप में है | इसमे से पीने योग्य पानी बहुत ही अल्प मात्रा में है | दुनिया भर में उपयोगी जल का 70 फीसदी हिस्सा सिंचाई कार्यों में इस्तेमाल होता है बाकि 20 फीसदी जल औद्योगिक कार्यों में तथा शेष 10 फीसदी जल घरेलु कामकाज के लिए प्रयोग में लाया जाता है | संयुक्त राष्ट्र संघ की एक रिपोर्ट के अनुसार 2025 तक दुनिया के 3.4 अरब लोगों को जल की तंगी का सामना करना पड़ेगा | वर्तमान समय में दुनिया के 1.8 अरब लोगों को प्रदूषित पानी पीने को मजबूर होना पड़ता है | सबसे बड़ी  समस्या यह है की कुल उपलब्ध जल का केवल 0.5 फीसदी ही पीने योग्य है | जल संरक्षण के लिए तमाम सरकारी एवं स्वयंसेवी संस्थायें काम कर रही हैं | आम आदमी भी इन संस्थाओं से जुड़कर जल संरक्षण के लिए काम कर सकता है यहीं नहीं जल संरक्षण के उपाय करके हम अपने घरों में भी पानी का इस्तेमाल 35 फीसदी तक काम कर सकते हैं | पानी बचाने के लिए हमें अपनी आदतें बदलनी होगी | यदि कहीं नल,पाइप लीक कर रहा है तो उसे तल्काल ठीक करायें, ब्रश करते या नहाते समय अनावश्यक पानी बर्बाद न करें प्राय: कई बार देखने को मिलता है की लोग नल चालू कर फ़ोन पर बात करने लगते हैं या कही चले जाते हैं और पानी गिरता रहता है | टॉयलेट में प्रतिव्यक्ति प्रतिदिन 10-12 लीटर पानी का प्रयोग होता  हैं | टॉयलेट में पानी बचने के लिए लो फ्लश का इस्तेमाल कर सकते हैं | बरसात के पानी का संचय करके जल के घटते भंडार को रोका जा सकता है इसके लिए तालाबों,पोखरों का पुनर्रुधारण करना आवश्यक है | हम ऐसे ही छोटे-छोटे उपाय कर जल बचाने में कारगर भूमिका निभा सकते हैं |
                                                           

Saturday, 23 January 2016

सच्चे मायने में गणतंत्र


वर्ष 2016 में भारत अपने गणतंत्र की 67 वीं वर्षगांठ मना रहा है। अंग्रेजों की गुलामी से स्वतंत्रता प्राप्त करने के पश्चात भारत ने आज ही के दिन से अपना नया संविधान लागू किया था। विश्व के 21 देशों के संविधान को पढ़कर संविधान सभा के 286 सदस्यों द्वारा 395 अनुच्छेदों में समाहित अंग्रेजी मूल भाषा में लिखे गए हमारे इस संविधान को 26 नवम्बर 1949 को स्वीकृत करके 26 जनवरी 1950 से लागू किया गया। गत 66 वर्षों में अब तक 125 से ज्यादा संशोधनों के अलावा इस संविधान का अनुवाद अनगिनत भाषाओं में हो चुका है। विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र के मूलाधार इस संविधान में निहित प्रावधानों की व्याख्या और विश्लेषण भारत ही नहीं विश्व के अनेक न्यायालयों द्वारा की गई  है।
किसी व्यक्ति के जीवन के 65वें वर्ष में प्रवेश को तो प्रौढ़ावस्था कहा जा सकता है किन्तु एक राष्ट्र के जीवन में तो इसे शैशवावस्था ही माना जाना चाहिए। किन्तु गत 66 वर्षों में हमने क्या खोया और क्या पाया, इसका आत्मावलोकन तो अवश्य करना ही चाहिए। हमने गण तंत्र दिवस तो मना लिया किन्तु क्या सच्चे माइने में हमारा यह तंत्र (व्यवस्था) गण (जनता) का है? अर्थात्, वर्तमान शासन व्यवस्था क्या वास्तव में जनता द्वारा जनता के लिए है? क्या भारत के प्रत्येक नागरिक को रोटी कपड़ा, मकान, सुरक्षा, शिक्षा व रोजगार के साथ अपने स्वाभिमान के साथ जीने का अधिकार मिल सका है। आजादी के बाद हमने भौतिक चकाचौंद तो प्राप्त किया, किन्तु अभी भी देश में चहुंओर व्याप्त भ्रष्टाचारअपराधीकरण तथा छुद्र राजनैतिक लालच से प्रेरित निर्णयों के कारण हमारे सांस्कृतिक व नैतिक मूल्यों का अवमूल्यन बहुत हुआ है। हमारा संविधान भारत के “समस्त नागरिकों को सामाजिक आर्थिक और राजनैतिक न्याय, विचार अभिव्यक्ति, विश्वास, धर्म व उपासना की स्वतंत्रता” के साथ “प्रतिष्ठा व अवसर की समानता प्राप्त कराने” की बात तो करता है किन्तु देश के साधारण नागरिकों को ये सब अधिकार मिलेंगे कैसे? यह एक बहुत बड़ा विचारणीय प्रश्न है।
आज नारी या जाति को आरक्षण नहीं सम्मान चाहिएहर वर्ग में समानता का भाव चाहिएबाजारीकरण का अंधानुकरण रुकना चाहिएशिक्षा का उद्देश्य लाभार्जन न होकर ज्ञानार्जन होना चाहिएरोटी-पानीकपड़ामकानबिजलीसड़कसुरक्षास्वास्थ्य व शिक्षा का सबको अधिकार मिलना ही चाहिएन्यायालयों की भाषा सर्वग्राही हिंदी होनी चाहिए। फसलों के सही दाम मिलेकॄषि भूमि को खतरनाक रसायनों से मुक्ति मिलेनई हरित क्रांति को बढ़ाबा मिलेमजदूरों को उनका उचित वेतन मिलेवनों के उजाड़, प्राणियों के शिकार तथा बेज़ुबानों पर अत्याचार रुकें। कटती हुई पर्वत मालाओंअवैध उत्थखनन और भू-माफ़ियों पर रोक लगेपर्यावरण की रक्षा और स्वास्थ्य की सुरक्षा का कानून बनेजिहादी आतंकवादनक्सलवाद व माओबाद पर रोक लगेस्वावलंबी भारत को परावलंबी बनाने के षड्यंत्रों पर रोक लगे और सभी देशवासी मिलकर स्वदेशी को अपनाएं व विदेशी दासता को भगाएं।
देश की राजनीति को शुचितापूर्ण बनाने हेतु निम्नांकित बिंन्दू मील के पत्थर साबित होंगे:
1          मतदाता सूचियों की गहन छानबीन कर उसमें से फ़र्जी नाम हटाए जाएं ।
2         जातिमतपंथसंप्रदायभाषाधर्म  राज्य के आधार पर विभाजनकारी आंकड़ों के प्रसारण  प्रकाशन पर पूर्ण रोक के साथ प्रत्याशियों द्वारा इनके उपयोग परप्रतिबंध हो इससे देश के सामाजिक  धार्मिक ताने-बाने को कोई नुकसान  पहुँचे।
3         वोट डालने के अधिकार के साथ मतदाता कोउसके कर्तव्य का बोध भी कराया जाए जिससे अधिकाधिक मतदाता जागरूक होकर बड़ी संख्या में मतदान कर सकें। मतदान हेतु अनिवार्य छुट्टी की व्यवस्था तो कर दी किन्तु जब तक नियोक्ता अपने सभी कर्मचारियों की उंगली देख कर यह सुनिश्चित न करे कि जिस कर्मचारी ने मतदान नहीं किया उसका वेतन काट दिया गया है, छुट्टी का कोई अर्थ नहीं है।
4         प्रत्येक मतदाता को अनिवार्य मतदान हेतु प्रेरित किया जाए। मतदान से जानबूझकर या निरंतर वंचित रहने वाले नागरिकों के विरुद्ध दंडात्मक कार्रवाई भी की जा सकतीहै।
5         मतदान की प्रणाली को सरलसुगम  सर्वग्राह्य बनाने हेतु इलैक्ट्रोनिक वोटिंग मशीनों के अलावा ई-नेट वोटिंग जैसे प्रावधान करने चाहिए जिससे कोई भी और कहीं भीआसानी से मतदान कर सके। इनसे देश का तथाकथित उच्चवर्ग जैसे उद्योगपतिप्रशासनिक अधिकारीबुद्धजीवी व बड़े व्यवसाइयों के अलावा चुनाव प्रक्रिया में सहभागीअधिकारी  कर्मचारी भी आसानी से किंतु अनिवार्य रूप से मतदान कर सकेंगे।
6         अपराधियों या अपराधी प्रवृत्ति के व्यक्तियों को चुनाव लड़ने से रोका जाए।
7         चुनाव लड़ने हेतु न्यूनतम शैक्षणिक योग्यताअनिवार्य स्वास्थ्य जांचअधिकतम आयु सीमा निर्धारित हो।
8         किसी भी राजनेता को संवैधानिक पद दिये जाने से पूर्व उसकी वह सभी छानबीन की जानी चाहिए जो एक सरकारी कर्मचारी की नियुक्ति हेतु आवश्यक है।
9         राजनैतिक दलों को आरटीआई के अन्तर्गत लाया जाए।
10      प्रत्येक प्रत्याशी को एक न्यूनतम घोषणा पत्र और उसके पालनार्थ न्यूनतम मापदण्ड निश्चित किए जाएं।
11       चुनावों से पूर्व किसी बडी लोक-लुभावन वोट लालची योजना की घोषणा सम्बन्धी बडे बडे विज्ञापनों पर रोक लगे।
12       सभी सरकारी विज्ञापनों (विशेषकर नेताओं के जन्म दिवस या पुण्य तिथियों के अवसर पर) में नेताओं की फ़ोटो या उनका गुणगान नहीं हो। जिस फ़ोटो में किसी नेता का फ़ोटो या नाम हो, उसका खर्च उसी से लिया जाए। अन्यथा नाम के स्थान पर उसका पद ही पर्याप्त है।
13       दुराचारीअपराधीअशिष्ट या अनचाहे सभी प्रत्याशियों को चुनाव से दूर रखने हेतु “नो वोट” के गोपनीय मतदान की व्यवस्था तो हो गई किन्तु एक निश्चित प्रतिशत से अधिक नो वोट पडने पर सभी प्रत्याशी चुनाव में खडे होने के लिए अयोग्य घोषित किए जाएं।
14       धन-बल के दुरुपयोग को रोकने तथा योग्य उम्मीदवार को चुनाव लडने हेतु सबल बनाने के लिए चुनाव का समस्त खर्च सरकार वहन करे।
15       मतदान केन्द्र व निर्वाचन कार्यालयों की वीडियो रिकॉर्डिंग हो।
16       प्रत्येक मतदाता को उससे सम्बन्धित प्रत्येक प्रत्याशी का सम्पूर्ण विवरण सरल ढंग से चुनाव आयोग द्वारा भेजा जाए जिससे मतदान से पूर्व सही व्यक्ति के चुनाव हेतु मतदाता को सहयोग मिल सके।
17       प्रत्येक निर्वाचित प्रतिनिधि के अनिवार्य बहुमुखी प्रशिक्षण की व्यवस्था हो जिसमें उससे सम्बन्धित कार्य का विस्तृत प्रशिक्षण दिया जाए।
18       चुने हुए जन प्रतिनिधियों के कार्य का वार्षिक अंकेक्षण व मूल्यांकन करा रिपोर्ट सार्वजनिक की जानी चाहिए जिससे जनता अपने जन प्रतिनिधि के कार्य का सही सही दर्शन कर सके। इसमें आर्थिक पक्ष के साथ साथ जन प्रतिनिधि का सामाजिक चेहरा भी सामने आए कि वह कितनी बार जनता के बीच रहा और कितनी बार उसने जनता की आवाज सदन में उठाई।
19       प्रतिवर्ष प्रत्येक जन प्रतिनिधि के स्वास्थ्य, कार्यक्षमता व नैतिकता की जांच कर यह रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए।
20      जन प्रतिनिधि को अपराधी ठहराए जाने या सजा सुनाए जाने के तत्काल बाद उसको पद्च्युत करने की व्यवस्था हो। इस कार्य की जांच पडताल हेतु प्रत्येक राज्य में एक निगरानी तंत्र की व्यवस्था हो जिसमें राज्य के महाधिवक्ता, अभियोजन महा निदेशालय, सूचना व प्रसारण विभाग व मीडिया के प्रतिनिधि शामिल हों ।
21       जिस सदन (यथा संसद, विधानसभाविधान परिषद्) के लिए प्रत्याशी चुना जाए उससे अनुपस्थित रहने या जनता के बीच कार्य करने में अक्षम या उदासीन रहने पर जन प्रतिनिधि के विरुद्ध कार्यवाही की व्यवस्था हो। यानि, राइट टू रिकॉल की भी व्यवस्था हो।


भारतीय ग्रंथों में भी कहा गया है कि ‘यथा राजा तथा प्रजा’ अर्थात जैसा राज वैसी ही उसकी प्रजा। उपर्युक्त सुझावों के सकारात्मक क्रियान्वयन हेतु न सिर्फ़ भारत के राष्ट्रपति, संसद तथा मुख्य चुनाव आयुक्त को बल्कि देश के प्रत्येक नागरिक को आगे आना होगा। यदि इन पर त्वरित गति से अमल हुआ तो न सिर्फ़ गण के तंत्र की मजबूत नींव रख देश की दिशा व दशा दोनों ठीक होगी, बल्कि भारत पुन: सोने की चिड़िया बन राम राज्य की ओर लौटेगा।

Saturday, 31 October 2015

सफलता के सोपान