Monday, 30 January 2017
कैंसर के इलाज में रेडिएशन उपयोगी
पूर्वांचल विश्वविद्यालय के विवेकानन्द केंद्रीय पुस्तकालय में तीन दिवसीय पुस्तक प्रदर्शनी का आयोजन
वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय के विवेकानन्द केंद्रीय पुस्तकालय में तीन दिवसीय पुस्तक प्रदर्शनी का आयोजन सोमवार को किया गया। पुस्तक प्रदर्शनी के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए बीएचयू के लाइब्रेरी साइंस के विभागाध्यक्ष एवं मानद पुस्तकालयाध्यक्ष प्रोफ़ेसर एच एन प्रसाद नें कहा कि ज्ञान की प्राप्ति एवं अनवरत बहाव के लिए पुस्तकें लाभकारी होती हैं। पुस्तकालय ज्ञानोपयोगी पुस्तकों के चयन का माध्यम है। आज के दौर में ऑनलाइन ज्ञान का विस्तार हो रहा है ऐसे में ठोस अध्ययन या सन्दर्भ के लिए अच्छे पुस्तकालयों की तलाश हर ज्ञान पिपासु करता है। Saturday, 28 January 2017
जानें कौन थी रानी पद्मावती क्या है पूरा विवाद ?
हिन्दी सिनेमा के मशहूर फ़िल्मकार संजय लीला भंसाली की आने वाली फ़िल्म 'पद्मावती' बनने से पहले ही सुर्खियों में आ गई है। भंसाली की यह फ़िल्म रानी पद्मावती और तुर्क शासक अलाउद्दीन खिलज़ी की कथित प्रेम कहानी पर केंद्रित है।मुख्य भूमिका में रणवीर सिंह, शाहिद कपूर और दीपिका पादुकोण हैं संजय लीला भंसाली ने फ़िल्म को ऐतिहासिक बताया है और यही उनकी समस्या है। अगर आप ये कहें कि यह हिस्ट्री नहीं है यह फ़िक्शन है तो शायद किसी को इतना ऐतराज न होता । ये सारी समस्या ही तब होती है जब आप इसे इतिहास के रूप में पेश करने की कोशिश करते हैं। राजस्थान में राजपूत जाति से ताल्लुक रखने वाले कुछ लोगों का कहना है कि अलाउद्दीन और रानी पद्मावती के बीच कोई प्रेम संबंध नहीं था। अचानक से 16वीं शताब्दी के हिन्दी साहित्य 'पद्मावत' की यह किरदार पद्मावती फिर से ज़िंदा हो गई है सवाल यहीं से शुरू होता है कि आखिर रानी पद्मावती कौन थी? वह ऐतिहासिक किरदार हैं या केवल साहित्यिक किरदार हैं? अतीत के आईने में यदि झांक कर देखा जाए तो माना जाता है कि मलिक मुहम्मद जायसी ने 1540 ईस्वी के आस-पास महाकाव्य 'पद्मावत' लिखा था। उस कृति के मुताबिक रानी पद्मावती, चित्तौड़ के राजा रावल रतन सिंह की पत्नी थीं।उस कहानी में बताया गया है कि रानी पद्मावती अप्रतिम सौंदर्य की मलिका थीं। दिल्ली का शासक अलाउद्दीन खिलजी उन पर फ़िदा था। पद्मावती को पाने के लिए उसने 1303 में चित्तौड़ पर हमला कर दिया और राजपूतों की उस युद्ध में हार हुई। खिलजी जब महल पहुंचा तो उसने देखा कि रानी पद्मावती समेत राजपूत महिलाओं ने जौहर(आत्मदाह ) कर लिया था। जौहर मध्ययुग में एक ऐसी प्रथा थी जब राजपूत राजाओं के युद्ध में मारे जाने के बाद उनकी रानियां दुश्मन के चंगुल से बचने के लिए सामूहिक रूप से आत्मदाह कर लेती थीं।
मलिक मोहम्मद ज्यासी के महाकाव्य ‘पद्मावत’ के कुछ पंक्ति जिसमें रानी पद्मिनी के विषय में उन्होंने बताया था –
गुरू सुआ जेइ पंथ देखावा ।
बिनु गुरु जगत को निरगुन पावा ?॥
नागमती यह दुनिया-धंधा ।
बाँचा सोइ न एहि चित बंधा ॥
राघव दूत सोई सैतानू । माया अलाउदीन सुलतानू ॥
प्रेम-कथा एहि भाँति बिचारहु । बूझि लेहु जौ बूझै पारहु ॥
इस कविता के अनुसार रानी पद्मावती चितौड़ के राजा राणा रतन सिंह की पत्नी थी और समकालीन सिंहली (श्रीलंका का एक द्वीप) राजा की बेटी थी। रानी पद्मिनी को उनके अपार दिव्य सौन्दर्य के लिए जाना जाता था और आज भी उनके सुन्दर्य के विषय में इतिहास में उल्लेख है।
पाकिस्तानी गुब्बारे ने मचाया हड़कंप
हरियाणा के सिरसा जिले में एक गांव में पाकिस्तानी बैलून मिलने से हड़कंप मच गया। बैलून के साथ 5000 का पाकिस्तानी नोट भी बंधा मिला। सिरसा के बड़ागुढ़ा थाना क्षेत्र के छतरिया गांव के खेत में फुटबालनुमा एक गुब्बारा मिला है। गुब्बारे पर एक पाकिस्तानी नोट भी बंधा हुआ था। सूचना पाकर पुलिस ने तुरंत मौके पर पहुंचकर गुब्बारे को कब्जे में लेकर छानबीन शुरू कर दी है। ऐसा पहली बार नही है।पाकिस्तान इससे पहले भी जासूसी करने के लिए कबूतर,गुब्बारे आदि भेजता रहता है।
सावधान! अख़बार की स्याही है जानलेवा हो सकता है कैंसर

भाजपा का घोषणा पत्र,जाने प्रमुख बातें...
'लोक संकल्प पत्र' नामक भाजपा के इस घोषणापत्र में किसानों, छात्रों से लेकर समाज के हर तबके को लुभाने की कोशिश की गई है। अमित शाह ने कहा कि हम अयोध्या में राम मंदिर बनाने के लिए संवैधानिक कोशिश करेंगे। साथ ही तीन तलाक के मसले पर प्रदेश की मुस्लिम महिलाओं से राय ली जाएगी।
भाजपा का घोषणापत्र 9 भागों में बांटा गया है। हम यूपी को प्रगतिशील राज्य बनाना चाहते हैं. बीजेपी इस संकल्प के साथ यहां आई है कि वो जनता के हर सपने को पूरा करेगी।

घोषणापत्र की अहम बातें:
यूपी में किसानों का कर्ज शत-प्रतिशत माफ होगा।
किसानों को बिना ब्याज के कर्ज देंगे।
धान के लिए किसान का शोषण नहीं होगा।
भूमिहीन किसानों को 2 लाख रुपए का बीमा देंगे।
कृषि विकास का फंड बनाया जाएगा।
अमूल की तरह यूपी में डेयरी शुरू की जाएगी।
बुंदलेखंड पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
यूपी में पुलिस के खाली पद तुरंत भरे जाएंगे।
प्रदेश में पलायन को रोका जाएगा।
पशुओं का कत्ल बंद होगा।
45 दिनों में सभी अपराधी जेल में बंद होंगे।
100 नंबर की सेवा को और मजबूत किया जाएगा।
धान को शत-प्रतिशत समर्थन मूल्य पर खरीदेंगे।
सरकार बनने के बाद एंटी-भूमाफिया टास्क फोर्स बनेगी।
खनन माफियाओं के लिए टास्क फोर्स बनेंगे।
40 हजार से अधिक अपराधी 40 दिनों के भीतर जेल में होंगे।
स्नातक तक लड़कियों और 12वीं तक लड़कों को मुफ्त में शिक्षा।
मुख्यमंत्री सिंचाई फंड की शुरूआत करेंगे।
एक साल तक लैपटॉप के साथ 1 जीबी डाटा मुफ्त
5 साल में 24 घंटे बिजली का वादा
डेढ़ लाख पुलिस के खाली पद भरे जाएंगे।
स्कूल-कॉलेज सहित यूनिवर्सिटी में फ्री वाई-फाई की सुविधा होगी।
हर गांव तहसील से जुड़ेंगे।
लखनऊ और मेट्रो शहर का विस्तार होगा।
हर घर में एलपीजी पहुंचाने का वादा।
कानपुर, झांसी़, मेरठ और गाजियाबाद में मेट्रो सेवा देंगे
2019 तक यूपी के हर घर में होगी बिजली
बुंदेलखंड की तस्वीर बदलने के लिए बुंदेलखंड विकास बोर्ड बनाएंगे।
पर्यटन स्थलों पर हेलीकॉप्टर सेवा की शुरुआत
अवैध खनन पूरी तरह बंद होंगे
गरीब परिवार की बेटी को जन्म के साथ ही 5000 रुपए की मदद देंगे
विधवा पेंशन 1000 रुपए की जाएगी
विधवा पेंशन के लिए उम्र की सीमा खत्म करेंगे
हर जिले में तीन महिला थाने बनेंगे
तीन तलाक के मुद्दे पर प्रदेश की मुस्लिम महिलाओं से राय लेंगे
गरीबों को फ्री में एलपीजी सिलेंडर देंगे
हर गांव को तहसील सेंटर से जोड़ा जाएगा
यूपी में 25 अस्पताल बनाए जाएंगे
यांत्रिक कत्लखाने को बंद किया जाएगा
25 नए सुपर स्पेशलिस्ट अस्पताल बनेंगे
संवैधानिक तरीके राम मंदिर बनाने की कोशिश करेंगे
गन्ना किसानों का भुगतान 14 दिनों में चेक से करेंगे
6 एम्स बनाने की व्यवस्था करेंगे
अधिकार के प्रति जागरूक करना मीडिया की जिम्मेदारी
उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज में आज भी उनकी परम्परागत व्यवस्था से न्याय मिल जाता है वहां दुराचार जैसी घटनाएं नहीं होती, लेकिन आज के सभ्य समाज में पुलिस एवं मीडिया के होते हुए दुराचार एवं अपराध की घटनाएं तेजी से बढ़ रही है। मीडिया की जिम्मेदारी है कि वह लोगों को जागरूक करें तथा नागरिकों को उनके अधिकारों के प्रति सचेत करें। इसके द्वारा परिवर्तन तभी लाया जा सकता है जब इसके संचालकों की दृष्टि समाज के प्रति समर्पित हो।
Thursday, 26 January 2017
क्या डीपी यादव की तरह ही मिलेगा मुख़्तार से दूरी का लाभ...
अखिलेश यादव ने 2012 विधानसभा चुनाव मे डीपी यादव के मुद्दे पर जिस तरह से लोगों के बीच अपनी छवि बनायीं और लोगों का भरोसा जीता ठीक उसी तरह इस बार भी मुख़्तार अंसारी को पार्टी में शामिल न करने की हठधर्मिता ने भी अखिलेश की छवि को धार दे दी है। दरअसल सपा के पूरे पारिवारिक विवाद की जड़ में ही कौमी एकता दल का विलय और मुख़्तार अंसारी ही थे। मुख्तार एवं उनकी पार्टी का जिस पुरजोर तरीके से अखिलेश ने विरोध किया, उससे ऐसे लोग जो राजनीति का अपराधिकरण नहीं चाहते, वे लोग भी अपनी तमाम आस्थाओं को छोड़ कर समाजवादी पार्टी के पक्ष मे मतदान करेंगे। इसलिए इसका प्रभाव सिर्फ एक सीट पर ही नहीँ बल्कि कई जिलों मे होगा। मुख़्तार के बसपा में जाने से कितना लाभ होगा यह तो समय ही बताएगा लेकिन गुंडों से दुरी बनाने वाली मायावती अब सत्ता का सुख भोगने के लिए गुड गुंडा और बैड गुंडा की श्रेणी बना दी है। जो कुछ भी हो लेकिन किसी दल को अपराधीकरण करने और गुंडाराज को बढ़ावा देने का कोई अधिकार नही है। वोटरों को चाहिए की वह अपने वोट की चोट से एक स्वस्थ सरकार और लोकतंत्र का निर्माण करें।
Wednesday, 25 January 2017
कहां है हमारा असली गणतंत्र...
असली गणतंत्र तभी बनता है जब संविधान कागज से निकलकर आम लोंगो के जिंदगी में शामिल हो जाये।
हम अपने देश का संविधान लागु कर गणतंत्र देश बन गए हमें गणतंत्र हुए 67 साल हो गए लेकिन सबसे बड़ा सवाल यहीं है कि क्या सही मायने में हम गणतंत्र हैं ? अगर इन बीते 67 सालों पर नजर डालें तो हम पूरी दुनिया में अपना लोहा मनवा चुके हैं। आज लगभग सभी क्षेत्रों में भारत दुनिया की 5 शक्तिशाली देशों की श्रेणियों में शामिल है। ऐसी दौरान भारत की अर्व्यवस्था दुनिया की सबसे तेज गति से विकास करने वाली अर्थव्यस्था बनी। पिछले कुछ वर्षों में भारत ने अग्नि-5 मिसाइल से लेकर मंगल यान के सफल प्रक्षेपण से पूरी दुनिया को आश्चर्य में डाल दिया। निः संदेह कुछ वर्षों में भारत ने अपना लोहा पूरी दुनिया में मनवाया है लेकिन वहीँ दूसरी तरफ दुःख इस बात का होता है कि भारत में अब भी गरीबी,भुखमरी,बेरोजगारी,किसानों की आत्महत्या, कुपोषण,भ्रष्टाचार और भेदभाव जैसी समस्याएं हमारी प्रगति और सच्चे गणतंत्र होने पर सवालिया निशान लगाती है। मेरा मानना है कि सच्चे मायने में गणतंत्र का सपना तभी पूरा होगा जब देश में स्वतंत्रता,समानता और भाईचारा कायम हो सभी को गरिमामय जीवन जीने का अधिकार मिले तथा सभी को आत्म निर्भर बनने के सामान अवसर प्राप्त हों इन सबके लिए संविधान में पर्याप्त व्यवस्था की गयी है लेकिन जरूरत है उसे ईमानदारी से लागू करने की। देश की राजनीती का अपराधीकरण और बाहुबल हावी होना भी चिंतनीय है। नेता की परिभाषा पूरी तरह बदल चुकी है अब उनका उद्देश्य जनसेवा न होकर स्वयंसेवा मात्र रह गया है चुनाव जीतने के बाद वे सोचते है भांड में जाये जनता अपना काम बनता। चुनावो में भारी मात्रा में लोगों को लालच देकर वोट ख़रीदे जाते हैं। ज्यादातर लोकल और पंचायती चुनावों की हालत बहुत ख़राब है। चुनाव लड़ना और जीतना दिनोदिन आम आदमी की पहुँच से बाहर होता जा रहा है। एक अच्छे गणतंत्र के निर्माण में उपरोक्त समस्यायों का निदान करना बहुत जरुरी है। बिना इसके सच्चे मायने में गणतंत्र की स्थापन संभव नही है।
