जानें कौन थी रानी पद्मावती क्या है पूरा विवाद ?
हिन्दी सिनेमा के मशहूर फ़िल्मकार संजय लीला भंसाली की आने वाली फ़िल्म 'पद्मावती' बनने से पहले ही सुर्खियों में आ गई है। भंसाली की यह फ़िल्म रानी पद्मावती और तुर्क शासक अलाउद्दीन खिलज़ी की कथित प्रेम कहानी पर केंद्रित है।मुख्य भूमिका में रणवीर सिंह, शाहिद कपूर और दीपिका पादुकोण हैं संजय लीला भंसाली ने फ़िल्म को ऐतिहासिक बताया है और यही उनकी समस्या है। अगर आप ये कहें कि यह हिस्ट्री नहीं है यह फ़िक्शन है तो शायद किसी को इतना ऐतराज न होता । ये सारी समस्या ही तब होती है जब आप इसे इतिहास के रूप में पेश करने की कोशिश करते हैं। राजस्थान में राजपूत जाति से ताल्लुक रखने वाले कुछ लोगों का कहना है कि अलाउद्दीन और रानी पद्मावती के बीच कोई प्रेम संबंध नहीं था। अचानक से 16वीं शताब्दी के हिन्दी साहित्य 'पद्मावत' की यह किरदार पद्मावती फिर से ज़िंदा हो गई है सवाल यहीं से शुरू होता है कि आखिर रानी पद्मावती कौन थी? वह ऐतिहासिक किरदार हैं या केवल साहित्यिक किरदार हैं? अतीत के आईने में यदि झांक कर देखा जाए तो माना जाता है कि मलिक मुहम्मद जायसी ने 1540 ईस्वी के आस-पास महाकाव्य 'पद्मावत' लिखा था। उस कृति के मुताबिक रानी पद्मावती, चित्तौड़ के राजा रावल रतन सिंह की पत्नी थीं।उस कहानी में बताया गया है कि रानी पद्मावती अप्रतिम सौंदर्य की मलिका थीं। दिल्ली का शासक अलाउद्दीन खिलजी उन पर फ़िदा था। पद्मावती को पाने के लिए उसने 1303 में चित्तौड़ पर हमला कर दिया और राजपूतों की उस युद्ध में हार हुई। खिलजी जब महल पहुंचा तो उसने देखा कि रानी पद्मावती समेत राजपूत महिलाओं ने जौहर(आत्मदाह ) कर लिया था। जौहर मध्ययुग में एक ऐसी प्रथा थी जब राजपूत राजाओं के युद्ध में मारे जाने के बाद उनकी रानियां दुश्मन के चंगुल से बचने के लिए सामूहिक रूप से आत्मदाह कर लेती थीं।
मलिक मोहम्मद ज्यासी के महाकाव्य ‘पद्मावत’ के कुछ पंक्ति जिसमें रानी पद्मिनी के विषय में उन्होंने बताया था –
गुरू सुआ जेइ पंथ देखावा ।
बिनु गुरु जगत को निरगुन पावा ?॥
नागमती यह दुनिया-धंधा ।
बाँचा सोइ न एहि चित बंधा ॥
राघव दूत सोई सैतानू । माया अलाउदीन सुलतानू ॥
प्रेम-कथा एहि भाँति बिचारहु । बूझि लेहु जौ बूझै पारहु ॥
इस कविता के अनुसार रानी पद्मावती चितौड़ के राजा राणा रतन सिंह की पत्नी थी और समकालीन सिंहली (श्रीलंका का एक द्वीप) राजा की बेटी थी। रानी पद्मिनी को उनके अपार दिव्य सौन्दर्य के लिए जाना जाता था और आज भी उनके सुन्दर्य के विषय में इतिहास में उल्लेख है।
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