असली गणतंत्र तभी बनता है जब संविधान कागज से निकलकर आम लोंगो के जिंदगी में शामिल हो जाये।
हम अपने देश का संविधान लागु कर गणतंत्र देश बन गए हमें गणतंत्र हुए 67 साल हो गए लेकिन सबसे बड़ा सवाल यहीं है कि क्या सही मायने में हम गणतंत्र हैं ? अगर इन बीते 67 सालों पर नजर डालें तो हम पूरी दुनिया में अपना लोहा मनवा चुके हैं। आज लगभग सभी क्षेत्रों में भारत दुनिया की 5 शक्तिशाली देशों की श्रेणियों में शामिल है। ऐसी दौरान भारत की अर्व्यवस्था दुनिया की सबसे तेज गति से विकास करने वाली अर्थव्यस्था बनी। पिछले कुछ वर्षों में भारत ने अग्नि-5 मिसाइल से लेकर मंगल यान के सफल प्रक्षेपण से पूरी दुनिया को आश्चर्य में डाल दिया। निः संदेह कुछ वर्षों में भारत ने अपना लोहा पूरी दुनिया में मनवाया है लेकिन वहीँ दूसरी तरफ दुःख इस बात का होता है कि भारत में अब भी गरीबी,भुखमरी,बेरोजगारी,किसानों की आत्महत्या, कुपोषण,भ्रष्टाचार और भेदभाव जैसी समस्याएं हमारी प्रगति और सच्चे गणतंत्र होने पर सवालिया निशान लगाती है। मेरा मानना है कि सच्चे मायने में गणतंत्र का सपना तभी पूरा होगा जब देश में स्वतंत्रता,समानता और भाईचारा कायम हो सभी को गरिमामय जीवन जीने का अधिकार मिले तथा सभी को आत्म निर्भर बनने के सामान अवसर प्राप्त हों इन सबके लिए संविधान में पर्याप्त व्यवस्था की गयी है लेकिन जरूरत है उसे ईमानदारी से लागू करने की। देश की राजनीती का अपराधीकरण और बाहुबल हावी होना भी चिंतनीय है। नेता की परिभाषा पूरी तरह बदल चुकी है अब उनका उद्देश्य जनसेवा न होकर स्वयंसेवा मात्र रह गया है चुनाव जीतने के बाद वे सोचते है भांड में जाये जनता अपना काम बनता। चुनावो में भारी मात्रा में लोगों को लालच देकर वोट ख़रीदे जाते हैं। ज्यादातर लोकल और पंचायती चुनावों की हालत बहुत ख़राब है। चुनाव लड़ना और जीतना दिनोदिन आम आदमी की पहुँच से बाहर होता जा रहा है। एक अच्छे गणतंत्र के निर्माण में उपरोक्त समस्यायों का निदान करना बहुत जरुरी है। बिना इसके सच्चे मायने में गणतंत्र की स्थापन संभव नही है।
Wednesday, 25 January 2017
कहां है हमारा असली गणतंत्र...
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