एक साथ 104 उपग्रहों की रिकॉर्ड लांचिंग पर सबसे पहले इसरो के वैज्ञानिकों और पूरी टीम को बधाई। मंगलयान की कामयाबी के बाद भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संस्थान ने बुधवार को सफलता का जो परचम फहराया है उससे पूरी दुनिया दंग है। अमेरिका की अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने भी भारतीय वैज्ञानिकों को बधाई दी है। आपको बता दें कि साल 2013 में भारत ने मंगल ग्रह का रूख़ किया और पहला मिशन मंगलयान मंगल ग्रह पर भेजा। भारत के इस मिशन की क़ामयाबी यह थी कि मंगलयान मिशन पहली बार में ही मंगल ग्रह पर पहुंच गया। अमरीका, रूस और चीन समेत कोई भी देश मंगल ग्रह पर अपनी पहली कोशिश में पहुंचने में सफल नहीं हो पाया था।
कम खर्च पर मंगलयान छोड़ने के बाद एक साथ 104 उपग्रहों की रिकॉर्ड लांचिंग करने वाले इसरो के शुरुआती दिनों को देखें तो आपको यह जानकर और भी आश्चर्य होगा कि इसरो ने अपने सफर की शुरूआत साइकल और बैलगाड़ी से की थी। डॉ. विक्रम साराभाई द्वारा 15 अगस्त 1969 में इसरो की स्थापना की गई थी। भारत में अंतरिक्ष कार्यक्रमों की शुरुआत डॉ विक्रम ए साराभाई की सूझबूझ से ही हुई। प्रारम्भिक दौर में देश के वैज्ञानिक पहला रॉकेट साइकल से प्रक्षेपण स्थल तक ले गए थे। दूसरा रॉकेट काफी भारी और बड़ा था इसलिए उसे बैलगाड़ी पर लादकर प्रक्षेपण स्थल तक ले जाया गया। उस वक्त नारियल के पेड़ों को लांचिंग पैड बनाया गया था। तब किसी को नहीं पता था कि आगे चलकर इसरो का हाथ थामना दुनिया के किसी भी देश के लिए आसान नहीं रह जाएगा। अब दुनिया में कोई नहीं है इसरो की टक्कर में और उपग्रहों की लांचिंग किफायती होने दुनिया के अन्य देश भी भारत से अपने उपग्रह प्रक्षेपित कराने में रूचि लेने लगे हैं। 104 उपग्रहों की सफलता इस बात का संकेत है कि भारत अंतरिक्ष बाजार के अरबों डॉलर के बाजार में तेजी से उभरेगा।
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