आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोगों के पास अपनों के साथ समय बिताने का भी वक़्त नही है लेकिन कुछ लोग ऐसे भी हैं जो सामाजिक सरोकारों के लिए हमेशा तैयार रहते हैं निःस्वार्थ भाव से देश समाज और मानवहित में अपना योगदान देते है,जी हां हम बात कर रहे हैं एक ऐसे ही व्यक्ति की जिनको एक घटना नें ट्रैफिक मैन बना दिया उन्होंने अपने जीवन से कुछ कीमती वक़्त निकाल कर समाजहित और जनहित में लगा दिया वह शख्स हैं डॉ. कृष्ण यादव जो मूलरूप से उत्तर प्रदेश के मऊ जिले के रहने वाले हैं वह इस समय नोएडा सेक्टर-55 में रहते हैं वह पेशे से आयुर्वेद के डॉक्टर हैं परिवार में पत्नी सहित तीन बेटियां और एक बेटा है। इन्होंने बताया कि 30 अक्टूबर 2011 को मैं जाम में फंसा था एक एम्बुलेंस भी घंटों जाम में फंसी रही और अगले दिन पता चला की एम्बुलेंस में ,मौजूद मरीज की मौत हो गयी। यह सुनकर उन्हें काफी दुःख हुआ और इस घटना ने उन्हें अंदर से झकझोर दिया उन्होंने यातायात के नियमों के प्रति लोगों को जागरूक करने का निर्णय लिया। वह प्रतिदिन 2 घंटे यातायात संचालन करते हैं इसके अलावा वह रास्ते से जा रहे होते हैं और कहीं जाम दिखता हैं तो वह बाइक साइड में खड़ा ट्रैफिक संचालन शुरू कर देते हैं इसके लिए उन्होंने एक छोटा सा लाउडस्पीकर और माइक भी खरीद रखा है। उनके ट्रैफिक संचालन की जानकारी जब पुलिस को हुयी तो यातायात पुलिस भी इनको जागरूकता अभियानों में बुलाने लगी। कई बार यह स्कूलों में भी जाकर बच्चों को भी यातायात नियमों के प्रति जागरुक करते हैं।इनको कई बार यातायात पुलिस द्वारा सम्मानित भी किया जा चुका है। ऐसे लोगों को देखकर पता चलता है कि समाज में आज भी ऐसे लोग है जो सामाजिक सरोकारों और मानवता के प्रति संवेदनशील हैं।Monday, 27 February 2017
कहानी एक ऐसे व्यक्ति की जिनको एक घटना ने बना दिया ट्रैफिक मैन
आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोगों के पास अपनों के साथ समय बिताने का भी वक़्त नही है लेकिन कुछ लोग ऐसे भी हैं जो सामाजिक सरोकारों के लिए हमेशा तैयार रहते हैं निःस्वार्थ भाव से देश समाज और मानवहित में अपना योगदान देते है,जी हां हम बात कर रहे हैं एक ऐसे ही व्यक्ति की जिनको एक घटना नें ट्रैफिक मैन बना दिया उन्होंने अपने जीवन से कुछ कीमती वक़्त निकाल कर समाजहित और जनहित में लगा दिया वह शख्स हैं डॉ. कृष्ण यादव जो मूलरूप से उत्तर प्रदेश के मऊ जिले के रहने वाले हैं वह इस समय नोएडा सेक्टर-55 में रहते हैं वह पेशे से आयुर्वेद के डॉक्टर हैं परिवार में पत्नी सहित तीन बेटियां और एक बेटा है। इन्होंने बताया कि 30 अक्टूबर 2011 को मैं जाम में फंसा था एक एम्बुलेंस भी घंटों जाम में फंसी रही और अगले दिन पता चला की एम्बुलेंस में ,मौजूद मरीज की मौत हो गयी। यह सुनकर उन्हें काफी दुःख हुआ और इस घटना ने उन्हें अंदर से झकझोर दिया उन्होंने यातायात के नियमों के प्रति लोगों को जागरूक करने का निर्णय लिया। वह प्रतिदिन 2 घंटे यातायात संचालन करते हैं इसके अलावा वह रास्ते से जा रहे होते हैं और कहीं जाम दिखता हैं तो वह बाइक साइड में खड़ा ट्रैफिक संचालन शुरू कर देते हैं इसके लिए उन्होंने एक छोटा सा लाउडस्पीकर और माइक भी खरीद रखा है। उनके ट्रैफिक संचालन की जानकारी जब पुलिस को हुयी तो यातायात पुलिस भी इनको जागरूकता अभियानों में बुलाने लगी। कई बार यह स्कूलों में भी जाकर बच्चों को भी यातायात नियमों के प्रति जागरुक करते हैं।इनको कई बार यातायात पुलिस द्वारा सम्मानित भी किया जा चुका है। ऐसे लोगों को देखकर पता चलता है कि समाज में आज भी ऐसे लोग है जो सामाजिक सरोकारों और मानवता के प्रति संवेदनशील हैं।
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